बालोद : जिला के संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र में स्थित राजनितिक रण भूमि के तौर पर पहचानी जानी वाली गुरूर विकासखंड की ग्राम पंचायत खुन्दनी में बिते कल अचानक बवाल मच गया था। बता दे कि ग्राम पंचायत खुन्दनी में मचे हुए बवाल का कारण गांव मे अनैतिक तरीके से अवैध अतिक्रमण है। बता दे कि अवैध अतिक्रमण का मामला लगभग सभी जगह एक जैसी है और दुख के कहना पड रहा है कि इस अवैध अतिक्रमण के चलते खुन्दनी के किसान भरे आषाड के महिने मे जिस बख्त खेती किसानी का दौर है, उस दरमियान में हलाकान है। इस बीच जरा सोचिए ग्राम पंचायत खुन्दनी में बसे हूये मेहनतकश अन्नदाता इस धरती के असल अन्नदाता भगवान है, जिन्हे भरे आषाड के महिने में अपने खेतो पर हल जोतने हेतू रोका जा रहा है। जरा गौर किजिये हमारे बडे बुजुर्ग अकसर कहा करते थे कि बेटा डार के चूके बेंदरा अऊ आषाढ के चूके माटीपुत्र किसान कभी नी उबर सके। दराशल इस बवाल के अधिष्ता जन्मदाता ग्राम पंचायत खुन्दनी में निवासरत एक रिटायर्ड शिक्षक पारखराम सोनभद्र नामक व्यक्ति ने खुन्दनी के अंदर मौजूद अन्य किसानो की आवाजाही को बुरी तरह से बाधित कर रखा है। ऐसे में इन दिनो खेती किसानी का दिन बादर है अब जाहिर सी बात सभी किसान अपने खेतो में जाना चाहेगें। अब सवाल यह है कि जब रिटायर शिक्षक पारखराम सोनभद्र गांव में रहते हुए अन्य किसानो को आने जाने हेतू रास्ता नही दे रहा है तो किसान अपने खेतो में जायेंगे कैसे?
अतिक्रमण के अधिष्ता रिटायर्ड शिक्षक पारख राम सोनभ्रद ने खुन्दनी के ग्रामीणों पर लगाया बायकाट छोडने का आरोप प्रसाशनिक अधिकारीयों से की शिकायत
गौरतलब हो कि अवैध अतिक्रमण के मामले में खुन्दनी के ग्रामीणों की माने तो रिटायर्ड शिक्षक पारखराम सोनभ्रद के द्वारा अन्य किसानो के साथ की जा रही ज्यादती को लेकर तहसीलदार गुरूर से पहले शिकायत की गई है और उनकी ओर से जिला प्रशासन और छत्तीसगढ़ सरकार से अनुरोध किया गया है कि उन्हे इँसाफ दिलाए। किन्तु जैसे कि माना जाता रहा है कि सरकारी काम में थोरकिन का बहुत देरी होथे। ठिक उसी प्रकार खुन्दनी के ग्रामीण बिते कल सुबह से बैगर खाए पीए पारख राम सोनभद्र के खिलाफ आँदोलन में देखे गए। इस बीच ग्रामीणों की आँदोलन की खबर शासन और प्रशासन की कानो तक पहुंची थी और तबतक बहुत देर भी हो चुकी थी। मौके पर पहुचे तहसीलदार हनुमत श्याम और कवंर चौकी प्रभारी सहित अन्य पुलिस स्टाप को देखकर खुन्दनी के ग्रामीण आक्रोशित हो गये थे। घंटो ग्रामीणों के मध्य और प्रशासनिक अधिकारीयों के बीच ताबडतोड बहस का दौर चला तद उपरांत गुरूर तहसीलदार हनुमत श्याम ने ग्रामीणों के बीच में सभी को अश्वासन देते हूये कहा कि आंदोलन को 28 जून 2025 के दिन तक टालिए उस दिन तक राजस्व विभाग की टिम कागजी कार्यवाही सहित सामने पक्ष का मत अभिमत एवं मौका जांच वैगरह की प्रकिया पूरी करने का प्रयास करेगी।