Dhamtri News : स्कूलों का काला खेल: ₹50K फीस, ₹5K वेतन वाले कच्चे टीचर—मगरलोड में हंगामा

संक्षेप

लूट फीस, बेच टीचर! RTE नियम तोड़ मगरलोड स्कूलों में अनट्रेंड युवा पढ़ा रहे

Dhamtri News : स्कूलों का काला खेल: ₹50K फीस, ₹5K वेतन वाले कच्चे टीचर—मगरलोड में हंगामा

विस्तृत खबरें

न्यूज रुटीन @ धमयरी / मगरलोड। छत्तीसगढ़ के मगरलोड ब्लॉक में निजी स्कूलों की पोल खुल गई—मोटी फीस वसूलकर कम वेतन बचाने के चक्कर में अप्रशिक्षित युवक-युवतियां बच्चों को पढ़ा रही हैं। RTE एक्ट और शिक्षा विभाग के नियमों की खुलेआम अवहेलना! नए सत्र में भी सैकड़ों स्कूलों में

B.Ed/D.El.Ed योग्य शिक्षक नदारद।

खुलासा: कौन पढ़ा रहा बच्चे?
स्थानीय जांच में पता चला कि 'श्री राम पब्लिक स्कूल', 'मॉडर्न एकेडमी' और 'ग्रीन वैली स्कूल' जैसे 15+ निजी संस्थानों में 12वीं पास या सीधे ग्रेजुएट्स को ₹ 5-8 हजार मासिक वेतन पर हायर किया गया।
RTE धारा 23 के तहत प्राइमरी शिक्षकों के लिए D.El.Ed अनिवार्य, अपर प्राइमरी के लिए B.Ed—लेकिन यहां अनुभवहीन युवा क्लास चला रहे।

अभिभावक रमेश साहू: "₹30-50 हजार सालाना फीस देते हैं, लेकिन टीचर खुद पढ़ना सीख रहे! बच्चे का भविष्य दांव पर।"

प्रबंधन का खेल: लाभ के लिए खिलवाड़

स्कूल मालिकों का तर्क: "प्रशिक्षित टीचर महंगे (₹15-25 हजार), हम कम बजट में चलाते हैं।" परिणाम—बच्चों की पढ़ाई प्रभावित। जिला शिक्षा अधिकारी के पास 50+ शिकायतें पेंडिंग, लेकिन जांच शून्य। NEP 2020 की गुणवत्ता पर जोर देते हुए भी विभाग चुप। स्थानीय शिक्षाविद् डॉ. अनिता वर्मा: "यह बच्चों के भविष्य के साथ अपराध है। तत्काल ऑडिट जरूरी।"

विभाग की चुप्पी: कार्रवाई कब?

शिक्षा विभाग से योग्यता सत्यापन या नियमित निरीक्षण की मांग तेज। गत वर्ष 10 स्कूलों पर जुर्माना हुआ, लेकिन इस बार सत्र शुरू होने के 2 माह बाद भी खामोशी। अभिभावक संगठन धरना की तैयारी में। सवाल: फीस रेगुलेशन तो है, टीचर क्वालिटी पर क्यों अंधेरा?
भविष्य का सवाल
मगरलोड जैसे ग्रामीण इलाकों में निजी स्कूल सरकारी विकल्प की कमी पूरी करते हैं, लेकिन लापरवाही से शिक्षा का बंटाधार। अब विभाग की बारी—कार्रवाई होगी या गैरप्रशिक्षितों का राज चलेगा?