न्यूज रुटीन @ रायपुर: इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) के राष्ट्रीय सचिव शिवशंकर सोनपिपरे ने छत्तीसगढ़ में पत्रकारों पर हो रहे लगातार हमलों, झूठे प्रकरणों और माफियाओं द्वारा दी जा रही धमकियों को लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती बताया है और राज्य सरकार से शीघ्र पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने तथा प्रभावित मामलों की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
सोनपिपरे ने कहा कि हाल के वर्षों में बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या और सुकमा के बप्पी राय से जुड़ी घटनाएँ सहित कई जिलों में पत्रकारों को मिली धमकियाँ और झूठे मुकदमों से पत्रकार समुदाय में भय व्याप्त है। "ऐसे मामलों की पारदर्शी जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, अन्यथा स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता प्रभावित होगी," उन्होंने कहा।
उन्होंने आगे बताया कि IFWJ प्रदेश के विभिन्न पत्रकार संगठनों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रहा है और अगर सरकार शीघ्र ठोस कदम नहीं उठाती है तो कई संगठनों के साथ मिलकर प्रदेश स्तरीय आंदोलन किया जाएगा। सोनपिपरे ने स्पष्ट किया, "स्वतंत्र और निर्भीक पत्रकारिता लोकतंत्र की आत्मा है। पत्रकारों पर कोई भी हमला सीधे लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला है। सरकार की जिम्मेदारी है कि पत्रकारों को सुरक्षित कार्य‑परिवेश मिले।"
IFWJ ने सरकार से सुझाव दिए हैं जिनमें शामिल हैं: (1) पत्रकार सुरक्षा कानून तत्काल लागू करना; (2) बीजापुर, सुकमा व अन्य विवादित मामलों की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच का आदेश देना; (3) पत्रकारों के विरुद्ध झूठे मुकदमों पर त्वरित मुकदमेबाजी और पेशेवर सुरक्षा गाइडलाइन लागू करना; और (4) स्थानीय स्तर पर सुरक्षा प्रोटोकॉल व समर्थन व्यवस्था स्थापित करना ताकि रिपोर्टिंग सुरक्षित तरीके से हो सके।
स्थानीय पत्रकार संगठनों ने भी IFWJ की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि रिपोर्टरों पर बढ़ते दबाव से सच सामने आने में रोड़ा आता है। कुछ संगठनों ने सरकार से शीघ्र बैठक बुलाने और बेहतर सुरक्षा तंत्र के लिए समन्वित योजना बनाने की अपील की है। सरकार की ओर से अभी इस पर आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
IFWJ की प्रेस वार्ता और स्थानीय पत्रकार संगठनों के साथ चल रही बैठकों के मद्देनजर, संभावित संयुक्त रणनीति जल्द घोषित की जा सकती है।)