Manpur mohla chawki : मुरारगोटा भूमि विवाद: 70 साल पुरानी खेती, राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और 25 एकड़ सरकारी जमीन पर सवाल

संक्षेप

70 साल की खेती पर फर्जीवाड़े का आरोप, 25 एकड़ जमीन विवाद में जांच लंबित

Manpur mohla chawki : मुरारगोटा भूमि विवाद: 70 साल पुरानी खेती, राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर और 25 एकड़ सरकारी जमीन पर सवाल

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न्यूज रूटीन @ छत्तीसगढ़ के मोहला-मानपुर जिले के खड़गांव थाना क्षेत्र के ग्राम मुरारगोटा में करीब 25 एकड़ जमीन को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। वर्षों से खेती करने का दावा करने वाले परिवार ने आरोप लगाया है कि राजस्व रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर बिना ग्रामसभा की स्वीकृति और वैधानिक प्रक्रिया के एक बाहरी व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि वर्ष 2007 से लगातार शिकायतें, ग्रामसभा के प्रस्ताव और नाम विलोपन की मांग के बावजूद आज तक मामले का अंतिम निराकरण नहीं हुआ। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित विभाग की ओर से भी इस संबंध में आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, ग्राम पंचायत मुरारगोटा, तहसील खड़गांव की लगभग 25 एकड़ भूमि पुराने राजस्व अभिलेखों में छोटे झाड़ और बड़े झाड़ जंगल के रूप में दर्ज है। परिवार का दावा है कि उनके पूर्वज वर्ष 1958-59 से इस भूमि पर खेती करते आ रहे हैं और स्थानीय ग्रामीण भी इस तथ्य से परिचित हैं। इसके बावजूद राजस्व रिकॉर्ड में कथित रूप से एक अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि विवादित भूमि का आगे किसी अन्य व्यक्ति को विक्रय भी कर दिया गया। उनका कहना है कि वर्ष 2007 से इस मामले में कई बार शिकायतें की गईं, ग्रामसभा ने प्रस्ताव भी पारित किए और नाम विलोपन की मांग उठाई गई, लेकिन जांच वर्षों बाद भी अधूरी है।

यह मामला अब राजस्व अभिलेखों की पारदर्शिता, ग्रामसभा की वैधानिक भूमिका और सरकारी भूमि की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भूमि वन प्रकृति की है या पुराने रिकॉर्ड में जंगल के रूप में दर्ज है, तो किसी भी प्रकार के नामांतरण या स्वामित्व परिवर्तन के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक होता है। ऐसे मामलों में छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 तथा वन संबंधी लागू कानूनों के प्रावधानों के अनुरूप जांच की जाती है। फिलहाल मामले में संबंधित राजस्व अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोप कितने सही हैं और रिकॉर्ड में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है या नहीं।