न्यूज रुटीन @ कोरबा में सरकारी जमीन पर कथित अतिक्रमण और अवैध निर्माण के एक मामले में प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत दिए जाने और जांच के निर्देश जारी होने के बावजूद संबंधित निर्माण कार्य पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायत के अनुसार, आरामशीन मुख्य मार्ग स्थित एक व्यावसायिक परिसर का निर्माण 1925 वर्गफीट शासकीय भूमि पर किया जा रहा है। आरोप है कि वर्ष 2002-03 के एक अस्थायी पट्टे के आधार पर बाद में भूमि का कथित रूप से 22 लाख रुपये में सौदा किया गया और निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक भूमि पर निर्माण शुरू कर दिया गया।
कार्रवाई में दोहरे मापदंड के आरोप
शिकायतकर्ता का कहना है कि हाल ही में प्रशासन ने सीतामढ़ी क्षेत्र में एक अन्य कथित अवैध निर्माण पर त्वरित कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया था, जबकि वर्तमान मामले में शिकायत और निर्देशों के बावजूद निर्माण कार्य जारी है। इसे लेकर प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
तहसीलदार और एसडीएम कार्यालय की भूमिका पर सवाल
शिकायतकर्ता के अनुसार, जनदर्शन में आवेदन मिलने के बाद कलेक्टर ने जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश तहसीलदार को दिए थे। इसके बावजूद लंबे समय बाद भी शासकीय पोर्टल पर शिकायत का निस्तारण लंबित बताया जा रहा है। इस बीच मौके पर निर्माण कार्य लगभग पूरा होने की स्थिति में पहुंच गया है।
नगर निगम की भूमिका भी सवालों के घेरे में
मामले में नगर पालिक निगम की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप है कि बिना आवश्यक अनुमति, मानचित्र स्वीकृति अथवा एनओसी के व्यावसायिक निर्माण किया जा रहा है, लेकिन निगम की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन से उठे प्रमुख सवाल
कलेक्टर के निर्देश के बावजूद निर्माण कार्य क्यों नहीं रोका गया?
क्या शिकायत की जांच निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की गई?
यदि निर्माण अनियमित है तो संबंधित विभागों ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
नगर निगम और नजूल विभाग ने मामले में क्या कदम उठाए?
निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर शासकीय भूमि पर कथित अतिक्रमण और निर्माण की वैधानिकता की जांच कराने तथा दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। वहीं संबंधित विभागों की ओर से इस संबंध में आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।