Bilaspur news : मस्तूरी थाना क्षेत्र में पत्रकार दंपति पर दबाव, गृह मंत्री के आदेशों का उल्लंघन

संक्षेप

बिलासपुर में पुलिस का 'खाकी कोचिंग सेंटर': अपराधियों को सिखाया जा रहा पत्रकारों को फंसाने का 'मास्टरप्लान

Bilaspur news : मस्तूरी थाना क्षेत्र में पत्रकार दंपति पर दबाव, गृह मंत्री के आदेशों का उल्लंघन

विस्तृत खबरें

न्यूज रुटीन @ बिलासपुर (छत्तीसगढ़), 24 दिसंबर 2025: छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। स्थानीय पत्रकार डी.पी. गोस्वामी और उनकी पत्नी दिव्या गोस्वामी ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी अपराधियों को संरक्षण देकर उन्हें ही फंसाने की साजिश रच रहे हैं। गृह मंत्री के तबादले के आदेश के बावजूद थाना प्रभारी और एसडीओपी ने आरोपियों को बुलाकर पत्रकार के खिलाफ शिकायत दर्ज करने की 'ट्रेनिंग' दी।थाने में अपराधियों की 'कोचिंग क्लास'मस्तूरी थाने में पुलिस ने अपराध सुधारने के बजाय अपराधियों को 'ट्रेनिंग' देना शुरू कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, गृह मंत्री के आदेश पर तबादले की तलवार लटकने के बाद एसडीओपी लालचंद मोहले और थाना प्रभारी ने 22 दिसंबर को भनेश्वर रोड स्थित विकास तिवारी के घर पर आरोपियों के साथ बैठक की। यहां 'मुर्गा-शराब' की महफिल के बीच पत्रकार गोस्वामी के खिलाफ 'उल्टी शिकायत' का प्लान बनाया गया। स्थानीय CCTV फुटेज इसकी पुष्टि कर सकते हैं।कबाड़ चोरी की सूचना पर पुलिस का 'बिजनेस टर्न'पत्रकार गोस्वामी ने कबाड़ चोरी की सूचना ईमानदारी से पुलिस को दी, लेकिन जांच अधिकारी शिव चंद्रा ने इसे 'बिजनेस प्रपोजल' बना लिया। आरोप है कि चंद्रा ने आरोपियों से ही 'डील' कर ली, जिससे पत्रकार की बजाय वे खुद सुरक्षित हो गए। गोस्वामी का कहना है कि पुलिस ने उनकी शिकायत को तोड़-मरोड़कर अपराधियों के पक्ष में इस्तेमाल किया।एसडीओपी का 'पुराना बैड रिकॉर्ड' और 'इंतजाम अली'एसडीओपी लालचंद मोहले पर पत्रकारों से पुरानी शत्रुता के आरोप हैं। पहले थाना प्रभारी रहते एक आत्महत्या प्रयास की खबर ने उनके 'नेटवर्क' को नुकसान पहुंचाया था। उनके 'पसंदीदा' अधिकारी शिव चंद्रा को स्थानीय स्तर पर 'इंतजाम अली' कहा जाता है। चंद्रा सीपत, रतनपुर, तोरवा, पामगढ़ और कोटा में तैनाती के दौरान कोल माफिया, रेत माफिया और क्रेशर कारोबारियों से जुड़े रहे। उनका नाम 'मिट्टी तेल स्कैंडल' में भी आया, जहां कोर्ट ने FIR के आदेश दिए। सूत्र बताते हैं कि एसडीओपी कार्यालय के दो आरक्षकों का तबादला महीनों से रोका गया है ताकि 'उगाही सिस्टम' बना रहे।विवादित महिला की भूमिका और न्यायालय कनेक्शनइस साजिश में एक अनुकंपा नियुक्ति वाली विवादित महिला की संलिप्तता के आरोप हैं। वह सरकारी नौकरी में सिर्फ साइन करके निकल जाती है और जिला न्यायालय परिसर में 'क्लाइंट तलाशने' व उगाही में लगी रहती है। CCTV फुटेज जांच के दायरे में हैं। जिला प्रशासन यदि जांच करे तो सेवा नियम उल्लंघन का बड़ा मामला बन सकता है।लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हमला?पत्रकार गोस्वामी ने कहा, "सच लिखने पर पुलिस और अपराधी एक हो गए। छत्तीसगढ़ में पत्रकारिता अब जोखिम भरी हो गई है।" गृह मंत्री के आदेशों का पालन न होने से सिस्टम पर सवाल उठे हैं। प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग हो रही है।