न्यूज रुटीन @ सारंगढ़-बिलाईगढ़ (छत्तीसगढ़) में युवा पत्रकार पोषराम साहू पर कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा कथित मारपीट का मामला सामने आया है। पत्रकार किसान सम्मान निधि योजना पर सवाल पूछने गए थे, जिससे अधिकारी नाराज हो गए। बीच-बचाव करने वाले वकील के साथ भी हाथापाई हुई। स्थानीय पत्रकार संगठन, विपक्ष और सामाजिक संगठनों ने निंदा की है और सख्त कार्रवाई व निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
प्रभाव और संदर्भ
यह घटना छत्तीसगढ़ में पत्रकार सुरक्षा और अभिव्यक्ति स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है। राज्य में पत्रकारों पर हमले के कई मामले पहले भी दर्ज हैं:
पिछले उदाहरण: 2023-25 में बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग में पत्रकारों पर हमले हुए, जिनमें सरकारी अफसरों का नाम आया। प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के अनुसार, छत्तीसगढ़ में 2024 में 15+ ऐसी घटनाएं।
कानूनी पक्ष: IPC की धारा 323 (मारपीट), 504 (अपमान) और प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट के तहत कार्रवाई संभव। छत्तीसगढ़ पत्रकार सुरक्षा अधिनियम 2021 मौजूद है, लेकिन अमल कमजोर।
प्रशासनिक जवाबदेही: जिला कलेक्टर या DM सारंगढ़-बिलाईगढ़ से आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा। IG रायगढ़ रेंज जांच कर सकते हैं।
स्थानीय आक्रोश बढ़ रहा है, जो लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को प्रभावित कर सकता है।
आगे की अपेक्षाएं
तत्काल कदम: FIR दर्ज, आरोपी सस्पेंड, MAG को सूचना।
मॉनिटरिंग: कल (20 अप्रैल 2026) तक पुलिस/कलेक्टर अपडेट दें। पत्रकार यूनियन छत्तीसगढ़ विरोध प्रदर्शन की योजना बना सकता है।