Shakti News : सक्ती जनपद में सात अधिकारियों को बचाने क्या चल रहा चूहे-बिल्ली का खेल

संक्षेप

सात अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार

Shakti News : सक्ती जनपद में सात अधिकारियों को बचाने क्या चल रहा चूहे-बिल्ली का खेल

विस्तृत खबरें

न्यूज रूटीन @ सक्ती - जनपद पंचायत सक्ती के तत्कालीन सीईओ से लेकर वर्तमान सीईओ की कार्यशैली इन दिनों खूब चर्चे में है। सक्ती जनपद के तत्कालीन सीईओ की मेहरबानी से 2 साल न सिर्फ भ्रष्टाचार पनपता रहा बल्कि गलत जांच प्रतिवेदन भी सही बनकर फाइल में दबा दी गई थी। लेकिन ग्राम वासियों के सजगता ने एक बार फिर बंद फाइल को खोल कर रख दिया है। नतीजा गलत जांच प्रतिवेदन देने वाले सात अधिकारियों पर कार्रवाई की तलवार लटकती हुई नजर आ रही है। परंतु एक बार फिर इन अधिकारियों को बचाने चूहे - बिल्ली का खेल खेले जाने की खबर सामने आ रही है।
प्राप्त जानकारी अनुसार कार्यालय जनपद पंचायत सक्ती द्वारा 29/07/24 को पत्र क्रमांक/1262/पंचायत/ज.पं./2024 में सक्ती जनपद सीईओ प्रीति पवार द्वारा सात अधिकारियों को कारण बताओं नोटिस जारी किया जाता है। इस नोटिस में ग्राम पंचायत पोरथा में 61,25,789 रूपये के संबंध में 15.80 लाख रुपए आहरण किए जाने के जांच प्रतिवेदन के संबंध में सभी सात अधिकारियों से 03 दिवस के भीतर अपने समक्ष उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत करने अल्टीमेटम दिया गया था। लेकिन मियाद खत्म होने के बाद भी किसी ने कोई जवाब प्रस्तुत नहीं किया जिसको लेकर एक बार फिर नोटिस जारी किया गया है।
लेकिन दोबारा नोटिस जारी करने को लेकर शहर में चर्चा सबसे तेज है। ऐसा गंभीर संवेदनशील मामला जिससे ना सिर्फ पोरथा पंचायत में विवाद की स्थिति बनी हुई है जिससे विभाग की छवि धूमिल हो रही है, तो वही आम जन मानस के बीच जिला प्रशासन और सरकार के प्रति कार्रवाई को लेकर विश्वास भी खत्म होता नजर आ रहा है। ऐसे में सात अधिकारी जो विभाग के अधीनस्थ आज भी कार्य कर रहे हैं, उन अधिकारियों से वरिष्ठ अधिकारी द्वारा एक महीने बीत जाने के बाद भी जवाब नहीं लिया जा सका जबकि जवाब प्रस्तुत नहीं करने पर उनके विरुद्ध उच्च कार्यालय को आवश्यक कार्रवाई हेतु पत्र प्रेषित किया जाने का लेख भी किया गया था। 

पूरे मामले में ऐसा प्रतीत हो रहा है कि इन सभी सात अधिकारियों को वरिष्ठ अधिकारियों के कार्रवाई से कोई भय  नहीं है या यू कह सकते हैं कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति होना है। शायद यही वजह है कि सभी सात अधिकारी सीईओ के नोटिस का भी जवाब देना लाजमी नहीं समझ रहे हैं। अब आलम यह है कि अब दोबारा नोटिस जारी करना पड़ रहा है जिसमें यथाशीघ्र जवाब देने को कहा गया है।

सूत्रों की माने तो इस तरह पहले नोटिस फिर दोबारा नोटिस को लेकर लोग अब जनपद में चूहे - बिल्ली का खेल चलने की बात कह रहे हैं। वहीं सूत्र यह भी बता रहा है कि जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर सातों अधिकारियों को बचाने के लिए कड़ा रूप नहीं अपना रहे है जिसके पीछे की कहानी भी समझ से परे नजर आ रही है। हालांकि इस बात में कितनी सच्चाई है इस पर मुहर लगाना सही नहीं होगा। 

आप सवाल यह है कि क्या सभी सात अधिकारी जिन्होंने अपने पद और अधिकार का दुरुपयोग करते हुए गलत जांच प्रतिवेदन विभाग को दिया था, उन पर विभाग की कार्यवाई होगी या नहीं? या फिर नोटिस नोटिस का खेल आगे भी जारी रहेगा और कुछ दिनों बाद मामले को ही ठंठे बस्ते में डाल दिया जायेगा।

इन सभी सात अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस...

1.रविंद्र कुमार पैकरा, अनुविभागीय अधिकारी, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, सक्ती।
2. यशवंत राज सिंह मांडेलकर, उप अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, सक्ती 
3. जयदीप घोष, उप अभियंता, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, सक्ती 
4. जितेंद्र कुमार बरेठ, करारोपण अधिकारी, जनपद पंचायत सक्ती।
5. अशोक कुमार जटावर, करारोपण अधिकारी, जनपद पंचायत सक्ती।
6. निखिल कश्यप, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, जनपद पंचायत सक्ती।
7. अनिल कुमार नोगरे, सहायक विकास विस्तार अधिकारी, जनपद पंचायत सक्ती।