मानवता की मिसाल: 10 साल बाद मां को जीवित देख बिलख पड़ा पूरा परिवार, समाज सेवी सुरेश निर्मलकर बने सूत्रधार
बेमेतरा से बालोद पहुंचे बेटा-बेटी, मां को सही-सलामत पाकर आंखों से बहे खुशी के आंसू
न्यूज रूटीन @बालोद : बालोद जिले में एक ऐसा मंजर जिसको देख आँखे आँसुओ से नम हो के रह गई ,
जानिए दास्तान हकीकत की
जिनका कोई नहीं सहारा, उनका ईश्वर सहारा होता है।इस कहावत को पूरी तरह चरितार्थ करते हुए बालोद के प्रबुद्ध समाजसेवी सुरेश निर्मलकर, एल्डरमैन श्रीमती हितेश्वरी कौशिक और शिव कृपा महिला मानस मंडली की मातृशक्तियों के अथक प्रयासों से एक ऐसा चमत्कार हुआ है, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। 10 वर्षों से अपनी मां श्रीमति चंद्रप्रभा को मृत मान चुके बच्चों को न सिर्फ उनकी मां वापस मिली, बल्कि वर्षों बाद पूरा बिखरा हुआ परिवार फिर से एक हो गया।
अस्पताल में भर्ती होने से शुरू हुई खोज
मामला तब प्रकाश में आया जब लगभग 70 वर्षीय बुजुर्ग श्रीमति चन्द्रप्रभा माता जी का स्वास्थ्य खराब होने पर उन्हें जिला अस्पताल बालोद में भर्ती कराया गया था। वे दो दिन बेहोश रहीं और उन्हें ऑक्सीजन लगाया गया था। अस्पताल में एक सप्ताह के इलाज के बाद जब माता जी की सेहत में सुधार हुआ, तो उनके परिजनों की खोजबीन शुरू की गई। उनके पास कोई संपर्क नंबर भी नहीं था।
समाजसेवी सुरेश निर्मलकर की मेहनत लाई रंग
आश्चर्य की बात यह थी कि इन 10 वर्षों में माता जी ने कभी भी अपने परिवार का जिक्र नहीं किया और न ही कभी बताया कि उनका कोई अपना भी है। इसके बावजूद समाजसेवी सुरेश निर्मलकर ने तत्परता दिखाते हुए उनके परिवार का पता लगाना शुरू किया। कड़े प्रयासों और गहन खोजबीन के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिली। पता चला कि बुजुर्ग माता जी के बेटा लखन मानिकपुरी ग्राम जेवरा और बेटी सोनी मानिकपुरी (पति मनहरण) ग्राम खैरझिटी, जिला बेमेतरा में निवास करते हैं। सुरेश जी ने इधर-उधर कई तरह से संपर्क साधा और उनके परिवार को उनकी मां के स्वस्थ, जीवित और सकुशल होने की जानकारी दी।
दस साल बाद बालोद में हुआ भावुक महामिलन
माता जी के बेटा-बेटी का पिछले 10 सालों से उनसे कोई संपर्क नहीं था। वे यह आस पूरी तरह छोड़ चुके थे कि उनकी मां इस दुनिया में हैं; जैसे ही उन्हें मां के जीवित होने की सूचना मिली, वे अपनी आंखों पर विश्वास नहीं कर पाए।
आज वह ऐतिहासिक क्षण आया जब बुजुर्ग माता जी से मिलने उनका पूरा परिवार एक साथ बालोद पहुंचा। 10 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद जैसे ही बच्चों और परिवार के सदस्यों ने अपनी बुजुर्ग मां को जीवित सामने देखा, तो बरसों का दर्द आंसू बनकर बह निकला। परिवार के सभी सदस्य माता जी से लिपटकर फफक-फफक कर रो पड़े। वहां मौजूद हर शख्स की आंखें इस दृश्य को देखकर नम हो गईं। पूरा परिवार अपनी मां को दोबारा पाकर भाव-विभोर हो गया और आदर पूर्वक उन्हें अपने साथ घर ले गया।
एल्डरमैन हितेश्वरी कौशिक और मानस मंडली का सराहनीय योगदान
इस पूरे सफर में एल्डरमैन श्रीमती हितेश्वरी कौशिक का मार्गदर्शन और योगदान अत्यंत सराहनीय वंदनीय रहा। उनके साथ ही शिव कृपा महिला मानस मंडली की अध्यक्ष कल्याणी कौशिक, श्रीमती अनीता देशमुख, रेखा यादव, गुनीता साहू, सुशीला यादव, निर्मला यादव, यशोदा यादव, गंगा शर्मा सहित मंडली के सभी सदस्यों ने पिछले 10 वर्षों से इस बुजुर्ग माता जी को अपने स्वयं के परिवार के सदस्य की भांति रखा। उनकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ध्यान रखना, बीमारी में निस्वार्थ सेवा करना और उन्हें कभी अकेलेपन का अहसास न होने देना, उनकी उच्च सोच और सेवा भाव को दर्शाता है।
समाज में सराहना: एक अनुकरणीय मिसाल
आज के दौर में जहां लोग अपनों को भूल जाते हैं, वहीं समाज सेवी सुरेश निर्मलकर, एल्डरमैन हितेश्वरी कौशिक और शिव कृपा महिला मानस मंडली का यह सेवा भाव और समर्पण समाज के लिए एक महान प्रेरणा है। बिछड़े हुए पूरे परिवार को दोबारा मिलाने में जो अहम भूमिका निभाई है, उसकी पूरे नगर और क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है। लोग इसे मानवता की सबसे बड़ी सेवा मान