न्यूज रूटीन @ बिलाईगढ़ – 24 वर्षों से लंबित डूबान क्षेत्र की जमीन के मुआवजे की मांग को लेकर शुरू हुआ किसानों का आंदोलन आखिरकार अपनी मंजिल तक पहुँच गया। 6 अगस्त से आरंभ हुए इस धरना-प्रदर्शन ने प्रशासन को झकझोर कर रख दिया और लगातार संघर्ष के बाद कलेक्टर के आदेशानुसार सभी प्रभावित किसानों को मुआवजा राशि प्रदान कर दी गई।
संघर्ष की शुरुआत: 6 अगस्त को उठी आवाज
किसानों ने लंबे समय से प्रशासन को अपनी समस्याओं से अवगत कराया था, परंतु केवल आश्वासन मिल रहा था। ऐसे में भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़ के प्रदेश सचिव मनीष चेलक ने किसानों की आवाज को मजबूती से उठाने का बीड़ा उठाया। 6 अगस्त को धरना-प्रदर्शन की आधिकारिक शुरुआत की गई।
संघर्ष के दौरान चुनौतियाँ
शुरुआत में किसानों ने आवेदन दिए और आंदोलन का समर्थन किया, लेकिन जैसे-जैसे प्रशासन ने दबाव बनाया और गांव में जाकर पंचनामा कराया, अधिकांश किसान पीछे हट गए। कई बार आंदोलन स्थल पर मनीष चेलक अकेले बैठे रहे, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। आंदोलन ने उतार-चढ़ाव देखे—कभी 8 लोग शामिल हुए, कभी केवल 2-3 लोग, और कई बार सिर्फ वे अकेले डटे रहे।
प्रशासनिक हस्तक्षेप और समाधान
लगातार प्रयासों, मीडिया के ध्यान और जनदबाव के कारण प्रशासन को कार्रवाई करनी पड़ी। अंततः कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद प्रभावित सभी किसानों को उनकी डूबान भूमि का मुआवजा स्वीकृत कर दिया गया।
मनीष चेलक का बयान
"यह केवल हमारी जीत नहीं, बल्कि न्याय की जीत है। यह संघर्ष इस बात का प्रतीक है कि सच्ची नीयत और दृढ़ संकल्प के साथ लड़ाई लड़ी जाए तो परिणाम अवश्य मिलता है। आज किसानों को उनका हक मिला है और यह पूरे जिले के लिए एक प्रेरणा बनेगी," – मनीष चेलक, प्रदेश सचिव, भीम रेजिमेंट छत्तीसगढ़।
न्याय के इस सफर से मिली सीख
इस आंदोलन ने यह दिखा दिया कि अगर अकेला इंसान भी सच्चे उद्देश्य से डटे, तो परिवर्तन संभव है। जहां शुरू में सामूहिक आंदोलन की बात थी, वहीं अंत में एक व्यक्ति की दृढ़ता ने सबको न्याय दिलाया।
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