न्यूज रूटीन @ सारंगढ़। राजनीति जब सेवा और कड़े संघर्ष का माध्यम बनती है, तो वह समाज को एक नई दिशा प्रदान करती है। सारंगढ़ विधानसभा क्षेत्र में आज एक ऐसे ही जुझारू, कर्मठ और लोकप्रिय युवा नेता की गूंज है, जिन्होंने अपने निस्वार्थ सेवा भाव से हर वर्ग के दिल में जगह बनाई है। हम बात कर रहे हैं विनोद भारद्वाज की, जिनका राजनीतिक सफर, राष्ट्रीय स्तर का संगठनात्मक अनुभव और जनसेवा के प्रति समर्पण आज सारंगढ़ की राजनीति के लिए एक मिसाल बन चुका है।
राष्ट्रीय नेतृत्व ने जताया भरोसा-
बिनोद भारद्वाज जी की संगठनात्मक क्षमता का लोहा केवल छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी माना गया है। कांग्रेस आलाकमान ने उनकी काबिलियत पर भरोसा जताते हुए उन्हें बिहार के वाल्मीकि विधान सभा चुनाव में अनुसूचित जाति विभाग की ओर से दिल्ली से मूल प्रभारी बनाकर भेजा था। अपनी कुशल रणनीति और दिन-रात की मेहनत के दम पर उन्होंने वहां बेहतरीन नेतृत्व किया, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस विधायक ने वहां शानदार जीत दर्ज की। इस बड़ी जिम्मेदारी को सफलतापूर्वक निभाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे जमीनी स्तर पर चुनावी समीकरण बदलने का हुनर रखते हैं।
राहुल गांधी की 'भारत जोड़ो यात्रा' में सक्रिय सहभागी-
कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी जी की ऐतिहासिक 'भारत जोड़ो यात्रा' में भी बिनोद भारद्वाज जी ने अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। देश को एकजुट करने और नफरत के खिलाफ मोहब्बत की दुकान खोलने के इस महाअभियान में वे पूरी निष्ठा के साथ कदम से कदम मिलाकर चले। राष्ट्रीय स्तर के इन बड़े आंदोलनों और सांगठनिक दौरों के अनुभवों का लाभ आज वे सारंगढ़ की जनता और स्थानीय संगठन को मजबूत करने में दे रहे हैं।
संघर्षों से तपा व्यक्तित्व-
04 जुलाई 1986 को जन्मे बिनोद भारद्वाज जी के जीवन का सफर आसान नहीं रहा। एक नौकरीपेशा पिता स्व० अवध राम भारद्वाज के पुत्र होने के नाते उन्होंने हमेशा ईमानदारी और मेहनत का रास्ता चुना। पिता के असमय निधन के बाद घर की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। पिता की कमी आज भी उनके जीवन में खलती है, लेकिन उन्होंने इस कमी को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी ताकत बनाया और जनसेवा के मार्ग पर आगे बढ़ चले। इस पूरे सफर में उनके भाई राजेश भारद्वाज उनके सच्चे सारथी बनकर उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे हैं।
स्कूल से शुरू हुआ नेतृत्व का सफर-
बिनोद भारद्वाज जी के भीतर नेतृत्व के गुण छात्र जीवन से ही दिखाई देने लगे थे। उनका राजनीतिक सफर सारंगढ़ के प्रतिष्ठित मल्टी पर्पस स्कूल से शाला नायक का चुनाव जीतकर शुरू हुआ था। छात्रों के अधिकारों के लिए लड़ने वाले बिनोद भारद्वाज ने तब से लेकर आज तक कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
सन 2001 से कांग्रेस के सच्चे सिपाही-
पार्टी के प्रति वफादारी क्या होती है, यह विनोद भारद्वाज से सीखा जा सकता है। सन 2001 से लेकर आज तक, प्रत्येक परिस्थिति में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामे रखा है। एक निष्ठावान कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने पार्टी के लिए अपना तन, मन और धन हमेशा न्योछावर किया है। संगठन को हमेशा सर्वोपरि मानने वाले बिनोद जी ने सारंगढ़ क्षेत्र में कांग्रेस मजबूती देने के लिए अपना सर्वश्व समर्पित कर दिया।
सारंगढ़ में राजनीति की परिभाषा बदल दी -
2020 से पहले सारंगढ़ की राजनीति में नेताओं और जनता के बीच एक दूरी दिखाई देती थी, लेकिन बिनोद भारद्वाज ने इस परिपाटी को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी अनिका भारद्वाज को जिला पंचायत चुनाव में ऐतिहासिक जीत दिलाकर क्षेत्र में सक्रिय भागीदारी की एक नई शुरुआत की। आज सारंगढ़ विधानसभा के प्रत्येक गांव और मंडल में किसी के घर सुख हो या दुख, विनोद भारद्वाज एक नेता बनकर नहीं, बल्कि परिवार के सदस्य के रूप में सबसे पहले खड़े नजर आते हैं। खेल-कूद से लेकर हर सामाजिक गतिविधियों में युवाओं को आगे बढ़ाने में वे हमेशा आगे रहते हैं। यही कारण है कि वे आज क्षेत्र की जनता के सबसे चहेते नेता बन चुके हैं।
भाजपा की लहर में भी अजेय रहे बिनोद -
आज के दौर में जहां राजनीति की हवाएं तेजी से बदलती हैं, वहां बिनोद भारद्वाज ने वह कर दिखाया है जो बिरले नेता ही कर पाते हैं। पूरे प्रदेश और क्षेत्र में भाजपा की प्रचंड लहर होने के बावजूद, बिनोद भारद्वाज जी ने न सिर्फ चुनाव लड़ा बल्कि अपनी मजबूत लोकप्रियता की ऐसी छाप छोड़ी कि विरोधी भी दंग रह गए। वे सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिला पंचायत में एकमात्र कांग्रेस समर्थित जिला पंचायत सदस्य हैं जिन्होंने शानदार जीत हासिल की है। राजनीति में एक बार जीतना किस्मत हो सकता है, लेकिन विपरीत परिस्थितियों और विरोधी लहर में दोबारा जीत हासिल करना केवल और केवल जनता के प्रति अटूट विश्वास, दिन-रात की मेहनत और मजबूत जमीनी पकड़ से ही संभव है। बिनोद जी की यह ऐतिहासिक जीत साबित करती है कि सारंगढ़ की जनता का उन पर कितना अटूट भरोसा है।
जनता के हक के लिए लड़ाई जेल तक सफर-
बिनोद भारद्वाज केवल मंचों से भाषण देने वाले नेता नहीं हैं, बल्कि वे जमीन पर उतरकर संघर्ष करने वाले जननेता हैं। सारंगढ़ चूना पत्थर खदान मामले में स्थानीय मजदूरों और जनता के हक के लिए वे सबसे आगे रहे और मुखर होकर आवाज उठाई। इस जन-आंदोलन के दौरान उन पर पुलिस रिपोर्ट भी दर्ज हुई, लेकिन जनहित के लिए उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की। जनता की भलाई के लिए वे आज भी हर लड़ाई लड़ने को तत्पर रहते हैं।
युवाओं की पहली पसंद-
अपनी मिलनसार छवि, बेदाग राजनीतिक जीवन और युवाओं के प्रति विशेष लगाव के कारण बिनोद भारद्वाज आज युवाओं के बीच खासे लोकप्रिय हैं। सारंगढ़ की जनता अब बदलाव और एक ऐसे मजबूत, अनुभवी व जमीनी नेतृत्व की ओर देख रही है जो उनके बीच का हो और उनके सुख-दुख को समझता हो।
क्षेत्र में लगातार मिल रहे जनसमर्थन और बुजुर्गों के आशीर्वाद से यह साफ है कि अगर पार्टी ने विश्वास जताया तो आगामी विधानसभा चुनाव में सारंगढ़ की देवतुल्य जनता विनोद भारद्वाज जी को भारी बहुमत से अपना आशीर्वाद देकर विधानसभा भेजने और क्षेत्र के विकास की कमान सौंपने के लिए पूरी तरह तैयार लग रही है।