न्यूज रुटीन @ कोरबा (छत्तीसगढ़) — डिजिटल इंडिया और पारदर्शिता के दावों के बीच कोरबा जिले के तिलकेजा ग्राम पंचायत से एक बड़े वित्तीय अनियमितता का मामला उजागर हुआ है। ग्राम पंचायत के ई-ग्राम स्वराज पोर्टल और सरकारी रिकार्ड से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 15वें वित्त आयोग की राशि के कुल ₹8,71,438 अनुपयुक्त तरीके से ट्रांसफर किए गए दिख रहे हैं। यह पैसा सीधे सार्वजनिक विकास कार्यों के बजाय कुछ पंचायत प्रतिनिधियों और उनके नजदीकी व्यक्तियों के खातों में गया है, जिससे ग्राम का पेयजल और स्वच्छता संबंधित काम प्रभावित हुए हैं।
क्या हुआ: पोर्टल ने खोला राज
सूचना के अधिकार (RTI) कार्यकर्ता व पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू ने जिला कलेक्टर के जनदर्शन में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में आरोप है कि 15वें वित्त आयोग की आवंटित राशि को भुगतान के तय नियमों को ताक पर रख कर निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। केंद्रीय निर्देशों के मुताबिक यह राशि पीएफएमएस (PFMS) पोर्टल के जरिए सीधे पंजीकृत वेंडरों को ही भुगतान की जानी चाहिए। नकद निकासी और निजी खातों में ट्रांसफर पूरी तरह से निषिद्ध हैं। परन्तु तिलकेजा में यही नियम दरकिनार कर दिये गये।
कितना और किसे गया
ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के वित्तीय ट्रांजैक्शन के आँकड़ों से मिली जानकारी के अनुसार राशि का विभाजन इस प्रकार है:
वार्ड पंच — ₹7,00,000
उपसरपंच — ₹65,100
अन्य वार्ड पंच — ₹62,838
ग्राम सभा अध्यक्ष — ₹43,500
शिकायत में डिजिटल साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा गया है कि इन ट्रांजैक्शनों के लिए आवश्यक चेकर आईडी और डिजिटल सिग्नेचर का प्रयोग नहीं हुआ, जो तकनीकी रूप से असम्भव है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि यह सरपंच तथा सचिव की संगठित साजिश और डिजिटल धोखाधड़ी है।
नियमों की उलंघन
केंद्र द्वारा निर्धारित टाइड (60%) तथा अनटाइड (40%) फंड के उपयोग संबंधी नियमों का उल्लंघन भी सामने आया है। नियमानुसार 60% राशि केवल पेयजल, स्वच्छता व वर्षा जल संचयन जैसे जरूरी कार्यों के लिए खर्च हो सकती है और किसी भी तरह का निजी लाभ देना प्रतिबंधित है। इसके अलावा, किसी भी धनराशि के उपयोग से पूर्व ग्राम सभा में GPDP (ग्राम पंचायत विकास योजना) में तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृति अनिवार्य है, जो इस मामले में पूरी तरह नदारद है।
मांगें और कानूनी दायराएं
शिकायत में जिला प्रशासन से तत्काल कड़ी कार्रवाई की मांग की गयी है। मुख्य माँगें निम्न हैं:
सरपंच की तत्काल बर्खास्तगी।
पंचायत सचिव का निलंबन और विभागीय जांच।
दोषियों की निजी चल-अचल संपत्तियों की कुर्की कर वसूली।
उरगा थाने में लोक-धन की चोरी व डिजिटल जालसाजी की नामजद FIR दर्ज कराई जाए।
प्रशासनिक जिम्मेदारी और अगला कदम
शिकायतकर्ता ने कलेक्टर से त्वरित संज्ञान लेने और मामलें की पड़ताल कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया है। अब यह स्पष्ट रूप से देखना बाकी है कि जिला प्रशासन कितनी तेजी से इस विषय पर कार्रवाई करता है — क्या मामला क्राइम ब्रांच और लोक लेखा टीम तक जाएगा, क्या पीएफएमएस और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के डिजिटल लॉग्स की फॉरेंसिक जाँच करायी जाएगी, और क्या वसूली तथा दंडात्मक कार्रवाई सुनियोजित ढंग से लागू की जाएगी।
प्रभाव: जनता और गाँव पर असर
स्थानीय लोग बताते हैं कि ग्राम में पेयजल योजनाएँ अधर में पड़ी हैं और स्वच्छता कार्य प्रभावित हुए हैं। विकास के लिए आवंटित निधि का दुरुपयोग सीधे जनहित को नुकसान पहुंचाता है और पंचायत राज व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गहरा प्रभाव डालता है।
क्या कहते हैं आरोपी और अधिकारियों की स्थिति
(अविलम्ब संपर्क के प्रयास जारी हैं) — इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक सरपंच और सचिव का पक्ष सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हुआ है। जिला प्रशासन/कलेक्टर कार्यालय से मिली टिप्पणियों को आने पर रिपोर्ट में जोड़ा जाएगा।
निष्कर्ष
तिलकेजा मामला डिजिटल युग में सार्वजनिक निधि के संरक्षण और पारदर्शिता की चुनौतियों को उजागर करता है। जहाँ एक ओर तकनीक अनुचित प्रथाओं को रोकने का साधन है, वहीँ दूसरी ओर उसकी कमज़ोरियों और दुरुपयोग के तरीके भी सामने आ रहे हैं। अब सवाल यह है कि प्रशासनिक त्वरितता और कानूनी कार्रवाई इस काले खेल को सबके सामने उजागर कर पायेगी या नहीं।