Raigarh news : धर्मजयगढ़: PMGSY की 54 लाख की पुलिया में भ्रष्टाचार का 'खुला खेल'! बिना सरिया की दीवार, झड़ता सीमेंट, टूटी पाइपलाइन—सरपंच की शिकायत से खुली पोल

संक्षेप

54 लाख की पुलिया और सड़क निर्माण में भारी धांधली, बिना सरिया के खड़ी कर दी दीवार

Raigarh news : धर्मजयगढ़: PMGSY की 54 लाख की पुलिया में भ्रष्टाचार का 'खुला खेल'! बिना सरिया की दीवार, झड़ता सीमेंट, टूटी पाइपलाइन—सरपंच की शिकायत से खुली पोल

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न्यूज रुटीन @ रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के धर्मजयगढ़ विकासखंड के ग्राम पंचायत पुसलदा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ें जमा ली हैं। विकास के नाम पर जनता की मेहनत की कमाई को लूटने का खेल चल रहा है, जिसका सबसे ताजा खुलासा ग्राम पंचायत की सरपंच श्रीमती कमला बाई राठिया ने किया है। उन्होंने तहसीलदार को सौंपे शिकायती पत्र में ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सरपंच ने शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री कार्यालय, कलेक्टर रायगढ़, जिला पंचायत CEO और क्षेत्रीय सांसद को भी भेजी है, जिससे मामला अब हाईकोर्ट स्तर तक पहुंच सकता है।बिना सरिया की 'खतरनाक' रिटेनिंग वॉलशिकायत का केंद्र खेदापाली से पुसलदा मार्ग पर बने तीन छोटे पुलों और सुरक्षा दीवार (रिटेनिंग वॉल) का निर्माण है, जिसकी लागत 54 लाख रुपये बताई गई है। सरपंच के अनुसार, मिट्टी कटाव रोकने के लिए बनी यह दीवार पूरी तरह बिना सरिया (लोहे की छड़) के बनाई गई है। एक ग्रामीण रामू यादव ने बताया, "हमने खुद देखा, मजदूरों ने सिर्फ मलबे और सीमेंट डाला, कोई लोहा नहीं। यह दीवार बारिश में गिर जाएगी, तो पुल ही तबाह हो जाएगा।" इंजीनियरिंग विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सरिया के RCC संरचना का जीवनकाल महज 6-12 महीने होता है, जो ग्रामीणों की जान से खिलवाड़ है। PMGSY दिशा-निर्देशों के मुताबिक, ऐसी दीवारों में न्यूनतम 8-12 mm सरिया अनिवार्य है।गुणवत्ता पर सवाल: सीमेंट झड़ रहा, रोड जर्जरनिर्माण की गुणवत्ता इतनी खराब है कि दीवार पर पानी का छिड़काव (क्यूरिंग) तक नहीं किया गया। नतीजा—सीमेंट अभी से झड़ने लगा है और दीवारों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। पास ही बनी सीसी रोड भी टूटने लगी है; जगह-जगह गड्ढे पड़ गए हैं। सरपंच ने कहा, "ठेकेदार ने घटिया सामग्री इस्तेमाल की। लोक निर्माण विभाग (PWD) के निरीक्षण में यह पास कैसे हो गया?" ग्रामीणों ने बताया कि रोड पर वाहन चलाते ही धूल उड़ती है और रात में दुर्घटना का खतरा रहता है।ग्रामीणों की परेशानी: नाली-पाइपलाइन तोड़ी, मरम्मत का नामोनिशान नहींठेकेदार की लापरवाही ने गांववासियों को दोहरी मार दी। निर्माण के दौरान पुरानी निस्तारी नाली और पेयजल पाइपलाइन को तोड़ दिया गया। चार महीने बाद भी मरम्मत नहीं हुई, जिससे जलभराव और पानी की किल्लत बढ़ गई। ग्रामिणी सुनीता बाई ने शिकायत की, "बारिश में घरों में गंदा पानी घुस जाता है। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं।" नाली की मरम्मत के लिए सरपंच ने अलग से 2 लाख का प्रस्ताव भेजा है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं।"यह शासन के दिशा-निर्देशों की खुली अवहेलना है। निष्पक्ष जांच हो, ठेकेदार का लाइसेंस रद्द हो और दोषी अधिकारियों पर FIR दर्ज हो—हमारी मांग है।"
— श्रीमती कमला बाई राठिया, सरपंच, ग्राम पंचायत पुसलदाप्रशासन की 'कुंभकर्ण नींद' पर सवालPWD और जिला प्रशासन की चुप्पी ने मामले को और गंभीर बना दिया है। PMGSY के तहत निरीक्षण अधिकारी ने निर्माण को 'पूर्ण' घोषित कर भुगतान जारी कर दिया, लेकिन कोई थर्ड-पार्टी ऑडिट नहीं हुआ। अब सवाल यह है कि क्या सरपंच की शिकायत पर तत्काल तकनीकी जांच टीम गठित होगी? क्या ब्लैकलिस्टिंग और कानूनी कार्रवाई होगी, या मामला दब जाएगा? स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में अक्सर कागजी कार्रवाई तक सीमित रहता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि जरूरत पड़ी तो सामूहिक धरना देंगे।