Bilaigarh news : जांच की माँग तेज: सरसींवा भूमि विवाद में राजस्व और पंजीयन विभाग पर सवाल

संक्षेप

सरसींवा भूमि घोटाला: दान भूमि के अवैध विक्रय पर लिखित शिकायत दर्ज

Bilaigarh news : जांच की माँग तेज: सरसींवा भूमि विवाद में राजस्व और पंजीयन विभाग पर सवाल

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न्यूज रुटीन @ सारंगढ़ बिलाईगढ़/ सरसींवा 20 जून 2026  । सरसींवा नगर में भू माफियाओ के नियमों के विरुद्ध कारनामे सामने आएं हैं। यहां रेरा के नियमों को तक में रखकर जमीन कारोबारी भूमि की प्लाटिंग की जा रही है इनके कृत्यों में सरकारी नुमाइंदे व विभागीय संरक्षण की मिलीभगत से इंकार नहीं कर सकते। भू माफिया खसरा नम्बरो की साठगाँठ – हेराफेरी कर अपने कृत्यों को अंजाम दे रहे हैं। इन मामलों में राजस्व विभाग, पंजीयन विभाग की भूमिका संदिग्ध है जिसकी जांच करने पर इनकी लापरवाही सामने आ जाएगी। बताया जा रहा है भूमिदान की जमीन को सक्षम प्रशासनिक अधिकारी के बिना अनुमति रजिस्ट्री एवं नामांतरण किए जा रहे हैं। उच्च अधिकारीयों से शिकायत के बावजूद कोई कार्यवाही नही होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।


इसकी शिकायत सरसींवा निवासी सुनील शर्मा ने सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिला के जिलाधीश से तत्काल कड़ी कार्यवाही करने लिखित में शिकायत की है। सुनील ने अपनी शिकायत पत्र में कहा कि भूमिदान की जमीन को भूमाफियाओं द्वारा बिना प्रशासनिक अनुमति के खरीदी बिक्री, नामान्तरण का कार्य जोरो पर चल रहा है जिससे नगर वासियों में आक्रोश व्याप्त है।आपको बतला दें कि सरसीवां नगर में भूमाफियाओं ने नियमों को ताक में रखकर कई बड़े बड़े कारनामे किए हैं। यदि जांच की जाती है तो कई खुलासे हो सकते हैं।सरसीवां में ये भूमाफिया कौड़ियों की जमीन को करोड़ो में बेची हैं जिससे शासन को करोड़ो रुपए की राजस्व क्षति हुई है वहीं कीमत बढ़ाने में इनकी अहम भूमिका है।

शिकायतकर्ता सुनील शर्मा ने बताया कि राजस्व नियमो एवं शासकीय शर्तो के अनुसार दान में प्राप्त भूमियो के किसी भी प्रकार के हस्तांतरण, क्रय विक्रय या अदला बदली के पूर्व जिला कलेक्टर की विधिवत अनुमति या अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना अनिवार्य है लेकिन यहां नियम कानून को ताक में रखकर भू माफियाओं ने सम्बन्धित विभागों की मिलीभगत कर करोड़ो की बेसकीमती भूमि को टुकड़ों में धड़ल्ले से खरीदी बिक्री का कृत्य कर रहे हैं। इतना ही नही पैसे के दम पर बिना किसी जांच पड़ताल के ऐसी भूमि के पंजीयन और नामान्तरण भी आनन फानन में किया जा रहा है। बताया जा रहा है खसरा नम्बर 253 भूमि की 90 टुकड़ो में करके क्रय विक्रय किये गए हैं जिसकी उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच व ऐसी सभी रजिस्ट्रीयां को शून्य घोषित करने की मांग की गई है।


शिकायतकर्ता के अनुसार, राजस्व नियमों एवं शासकीय प्रावधानों के तहत दान में प्राप्त भूमि के हस्तांतरण, क्रय-विक्रय अथवा अदला-बदली से पूर्व जिला कलेक्टर की विधिवत अनुमति अथवा अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके बावजूद कथित रूप से विभागीय मिलीभगत से करोड़ों रुपये मूल्य की भूमि को छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर बेचा जा रहा है।

सुनील शर्मा का आरोप है कि धनबल के प्रभाव में बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के ऐसी भूमि का पंजीयन और नामांतरण भी किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से खसरा नंबर 253 का उल्लेख करते हुए दावा किया है कि इस भूमि को लगभग 90 टुकड़ों में विभाजित कर खरीदी-बिक्री की गई है।

शिकायत में पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ नियमों के विरुद्ध हुई सभी रजिस्ट्रियों को निरस्त (शून्य घोषित) करने की मांग की गई है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि मामले की गंभीरता से जांच की जाए तो कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। वहीं, आरोप है कि इस प्रकार के भूमि सौदों से शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है तथा क्षेत्र में भूमि की कीमतों में असामान्य वृद्धि हुई है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। शिकायत पर आगे की कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा है।