न्यूज रुटीन @ विशेष रिपोर्ट सरसींवा (सारंगढ़-बिलाईगढ़) – आम जनता को राहत देने और “घर बैठे न्याय” का सपना दिखाने वाला ऑनलाइन जन शिकायत पोर्टल अब खुद ही सवालों के घेरे में है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि शिकायतें महीनों तक हेड ऑफिस में “विचाराधीन” के नाम पर दबाकर रखी जा रही हैं। यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि व्यवस्था के साथ खुला खिलवाड़ और जनता के अधिकारों का सीधा हनन है।
ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का साफ आरोप है कि रायपुर स्थित हेड ऑफिस में बैठे अधिकारी जानबूझकर शिकायतों को आगे नहीं बढ़ा रहे। न समाधान न कार्रवाई—बस फाइलों को रोके रखने का खेल चल रहा है। जब पीड़ित अधिकारी से संपर्क करते हैं, तो उन्हें या तो टालमटोल जवाब मिलता है या फिर सीधा अनदेखा कर दिया जाता है। यह रवैया दर्शाता है कि जिम्मेदार अधिकारी अपनी जवाबदेही से पूरी तरह मुंह मोड़ चुके हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने पारदर्शिता और त्वरित समाधान के लिए यह पोर्टल बनाया, तो फिर आखिर किसके इशारे पर शिकायतों को दबाया जा रहा है? क्या यह महज लापरवाही है या इसके पीछे कोई सुनियोजित साजिश? यदि शिकायतें समय पर निपटनी ही नहीं हैं, तो इस पोर्टल का अस्तित्व ही क्यों? स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोग अब ऑनलाइन व्यवस्था से भरोसा खोकर फिर पुराने सिस्टम—जन सुनवाई की लंबी कतारों—की ओर लौटने को मजबूर हैं। यह सीधे-सीधे शासन की मंशा और योजनाओं की विफलता को उजागर करता है।
अब समय आ गया है कि जिले और राज्य के बड़े अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल संज्ञान लें। लंबित शिकायतों की उच्चस्तरीय जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। अन्यथा, यह “जन शिकायत पोर्टल” केवल कागजों और दिखावे तक सीमित रह जाएगा, और जनता का भरोसा पूरी तरह टूट जाएगा।