Khairagarh news : छत्तीसगढ़: मंदिर में दिखा दुर्लभ पाम सिवेट, वन विभाग टीम ने की सुरक्षित रेस्क्यू

संक्षेप

मंदिर की छज्जे पर पाम सिवेट दिखाई दिया; वन विभाग की टीम ने सुरक्षित निकाला — छत्तीसगढ़

Khairagarh news : छत्तीसगढ़: मंदिर में दिखा दुर्लभ पाम सिवेट, वन विभाग  टीम ने की सुरक्षित रेस्क्यू

विस्तृत खबरें

न्यूज रुटीन @ खैरागढ़:-  छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ में रविवार सुबह राधाकृष्ण मंदिर के ऊपरी छज्जे पर एक दुर्लभ वन्यजीव — पाम सिवेट — दिखाई पड़ा, जिससे स्थानीय लोगों में उत्सुकता और चिंता दोनों फैल गयीं। मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन वन विभाग की टीम समय रहते पहुँचकर सावधानीपूर्वक रेस्क्यू कर पाम सिवेट को सुरक्षित हटाने में सफल रही।
घटना का विस्तृत विवरण
सुबह पूजा की तैयारी के दौरान मंदिर के पुजारी की नजर छज्जे पर चमकती आँखों वाले जानवर पर पड़ी। शुरुआती भ्रम के बाद स्थानीयों और मंदिर प्रबंधन ने वन विभाग को सूचित किया। कुछ ही मिनटों में बड़ी संख्या में लोग जुट गए, जिससे स्थिति कुछ तनावपूर्ण हो गयी। वन विभाग की टीम ने भीड़ को नियंत्रित किया और विशेष उपकरण व विशेषज्ञों की मदद से पाम सिवेट को मंदिर से सुरक्षित बाहर निकाला। पशु को प्राथमिक स्वास्थ्य जांच के बाद नजदीकी वन-क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
पाम सिवेट — पहचान और व्यवहार
पाम सिवेट दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया में पाए जाने वाला एक निशाचर और पेड़-पराश्रित स्तनपायी है। यह आमतौर पर रात में सक्रिय रहता है और फलों, कीटों तथा छोटे जंतुओं का भक्षण करता है। लंबी पूँछ, तेज爬行 क्षमता और पेड़ों पर चढ़ने की महारत इसकी प्रमुख विशेषताएँ हैं। दिन में यह छिपकर या बंद मकानों/छज्जों में शरण ले लेता है, इसलिए पुराने मंदिरों व खाली इमारतों में इसकी उपस्थिति मिल सकती है।
 
वन वैज्ञानिकों व वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार शहर-आबादी के पास पाम सिवेट के दिखने के पीछे कई कारण हैं:
आवास कटाव: जंगलों की कटाई व प्राकृतिक आवास घटने से ये प्राणी भोजन व आश्रय की तलाश में मानव-निवास वाले क्षेत्रों तक आते हैं।

भोजन की पहुँच: नगरों-गाँवों में रखे फल, कचरे या पालतू पक्षियों का अंडा पाम सिवेट को आकर्षित कर सकता है।
मानव-पर्यावरण संघर्ष: खेतों व छोटे जंगलों के बीच बने पेड़-पौधों की पट्टियाँ इनके लिए जरूरी कॉरिडोर का काम करती हैं; इनका नष्ट होना संघर्ष बढ़ाता है।

वन विभाग की कार्रवाई और सार्वजनिक अपील
खैरागढ़ के डिविजनल फॉरेस्ट अफसर (DFO) पंकज राजपूत ने कहा कि टीम ने घटनास्थल पर पहुँचकर पाम सिवेट को बिना घायल किए सुरक्षित रेस्क्यू किया और पशु को नजदीकी उपयुक्त आवास में छोड़ दिया गया। DFO ने लोगों से अपील की:
किसी भी जंगली जानवर को हाथ से छूने या डराने का प्रयास न करें।
जानवर घबराने पर हमला या भाग सकते हैं; ऐसे में तुरंत वन विभाग को सूचित करें।
मंदिरों, पुराने खाली मकानों और पेड़ों पर भीड़ इकट्ठा करने से बचें — इससे जानवरों पर दबाव बना सकता है।
स्थानीय प्रतिक्रिया और भविष्य की चिंताएँ
मंदिर पर पाम सिवेट के दिखने से स्थानीय लोगों में उत्सुकता थी, परन्तु विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक घटना न मानकर एक चेतावनी बता रहे हैं। खैरागढ़ और आसपास के क्षेत्रों में बचे हुए जंगलों, खेतों और पेड़ों की पट्टियों का संरक्षण तथा मानव-विवशता को कम करने के लिए सामुदायिक जागरूकता और वन-प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है। यदि आवास व भोजन की उपलब्धता घटती रही तो शहर और जंगल के बीच संघर्ष बढ़ सकता है, जिससे दोनों पक्षों के लिए जोखिम उत्पन्न होंगे।

"पाम सिवेट जंगल के पारिस्थितिक तंत्र में बीज प्रसारक का काम करते हैं; इनके आने से पारिस्थितिक संतुलन प्रभावित होता है," 
"सुरक्षित रेस्क्यू और सामुदायिक जागरूकता से ही ऐसे घटनाओं में जानवर व मानव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है," — DFO पंकज राजपूत।