न्यूज रूटीन @ बालोद। शहर के व्यस्त सदर रोड पर आज सुबह से प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की, जिसमें बुलडोजर और भारी पुलिस बल तैनात रहे। कार्रवाई के दौरान दुकानों के सामने बने अवैध हिस्सों को तोड़कर हटाया गया, लेकिन स्थानीय लोगों और व्यापारियों ने कार्रवाई की पारदर्शिता व सीमा को लेकर सवाल उठाए हैं।
व्यापारियों का आरोप है कि सदर रोड पर कई स्थानों पर अतिक्रमण लगभग 8 मीटर तक है, जबकि प्रशासन ने केवल 3 मीटर तक ही अतिक्रमण हटाया। उन्होंने कहा कि शहर के अन्य इलाकों में शासकीय जमीन से अतिक्रमण पूरी तरह हटाया गया, परंतु सदर रोड के मामलों में प्रशासन नरमी बरत रहा है। इसी आधार पर व्यापारियों ने प्रशासन पर दोहरी नीति अपना रहे होने का आरोप लगाया है।
कड़ी सुरक्षा के बीच हुई कार्रवाई
कार्रवाई के दौरान इलाके में भारी संख्या में पुलिस तैनात की गई थी ताकि किसी तरह की तनातनी या विवाद की स्थिति न उत्पन्न हो। प्रशासन की टीम ने बुलडोजर की मदद से दुकानों के सामने बने अवैध विस्तार, काँसेप्ट शेड और खोखे तोड़े। कई दुकानदार अपने सामान को बचाते हुए नजर आए, वहीं कुछ ने कार्रवाई के खिलाफ कागजात प्रस्तुत करने की मांग भी रखी।
प्रशासनिक सूत्रों ने कहा कि कार्रवाई नियमानुसार और चिन्हित अतिक्रमण ही हटाकर की जा रही है। अधिकारियों ने बताया कि नगर नियोजन और संबंधित रिकॉर्ड के आधार पर जिन हिस्सों को चिन्हित किया गया था, वही हटाए गए। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि आगे भी आवश्यकतानुसार और सर्वे के बाद कार्रवाई जारी रहेगी।
व्यापारी यह भी बताते हैं कि सदर रोड पर वर्षों से कब्जा कर रखे गए हिस्से स्थानीय जमीनी हकीकत के अनुरूप चिन्हित करने पर आकार में अधिक निकले हैं, इसलिए उनकी मांग है कि पूरा सर्वे कर पूर्ण रूप से 8 मीटर तक के अतिक्रमण को हटाया जाए। व्यापारियों का यह भी आरोप है कि कुछ प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे अन्य दुकानदारों में असंतोष बढ़ा है।
स्थानीय नागरिक एवं व्यापारी संघ ने आरोपों की नीतिगत जांच की मांग की है और कहा है कि यदि जल्द निष्पक्ष सर्वे नहीं किया गया तो वे उच्च अधिकारियों व न्यायालय का रुख करने पर विचार करेंगे। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि दस्तावेजी और सर्वे आधारित प्रक्रिया जारी है और किसी के साथ भी अनावश्यक भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बालोद सदर रोड की यह कार्रवाई फिलहाल विवादित नजर आ रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि आगे प्रशासन कितनी दूरी तक जाकर सभी चिन्हित अतिक्रमण हटाएगा या क्या यह कदम केवल खानापूर्ति ही साबित होगा। नागरिक और व्यापारी अब निष्पक्ष सर्वे और स्पष्ट कार्रवाई की मांग करते हुए आगे की रणनीति पर नजर बनाए हुए हैं।