न्यूज रुटीन @ | बिलासपुर बिलासपुर के कोनी में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से बने 240‑बेड सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और 100‑बेड कैंसर केयर अस्पताल का संचालन अब सार्वजनिक सवाल बन चुका है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि जनता के टैक्स, सरकारी जमीन और सरकारी मशीनें लगाकर तैयार इस परियोजना को अब निजी भागीदारी (PPP) के तहत संचालित करने की तैयारी क्यों हो रही है, जबकि सरकार पहले ही निर्माण व संसाधन उपलब्ध करा चुकी है।
पूर्व जिला कांग्रेस अध्यक्ष विजय केशरवानी ने प्रेस वार्ता में पूछा कि PPP मॉडल लागू होने पर आम मरीज को कौन‑सा अतिरिक्त लाभ मिलेगा जो सरकारी व्यवस्था नहीं दे सकती। उन्होंने गरीब, मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग के मरीजों के मुफ्त व सुलभ उपचार की गारंटी मांगने पर ज़ोर दिया।
उद्घाटन के डेढ़ साल बाद भी अधूरी सेवाएँ
इस अस्पताल का उद्घाटन 29 अक्टूबर 2024 को प्रधानमंत्री ने किया था; इसके बाद मुख्यमंत्री ने भी निरीक्षण किया। बावजूद इसके कांग्रेस का कहना है कि डेढ़ वर्ष बीतने पर भी अस्पताल पूरी क्षमता से नहीं चल रहा। सवाल उठ रहे हैं — विशेषज्ञ डॉक्टर क्यों उपलब्ध नहीं हैं, गंभीर मरीजों को अभी भी दूसरे अस्पतालों में क्यों रेफर किया जा रहा है और आवश्यक आईसीयू, कैथलैब व अन्य सेवाएँ कब चालू होंगी।
स्टाफ व भर्ती पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा
कांग्रेस ने अस्पताल के सुचारु संचालन के लिए आवश्यक स्टाफ की कमी पर सरकार से जवाब मांगा—240+100 बेड के लिए कितने पद स्वीकृत किए गए, वर्तमान में कितने डॉक्टर, नर्स व तकनीकी कर्मचारी नियुक्त हैं और भर्ती प्रक्रिया क्यों अधर में है। विजय ने पूछा कि क्या उद्घाटन करके अस्पताल चालू करने की तैयारी पूरी नहीं की गई थी।
शासकीय दस्तावेजों में PPP प्रक्रिया व KPMG का ज़िक्र
कांग्रेस ने दावा किया कि उनके सवाल मात्र राजनीतिक नहीं बल्कि शासकीय दस्तावेजों पर आधारित हैं। चिकित्सा शिक्षा विभाग के पत्र (10‑06‑2026) में संचालन हेतु PPP प्रक्रिया, Revised RFP, Revised License Agreement व Financial Modelling का उल्लेख है। 26‑06‑2026 के पत्र में Tender Processing Committee और निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की जानकारी दी गई है। दस्तावेजों में कंसल्टेंट के रूप में KPMG का भी नाम है। इन तथ्यों के आधार पर कांग्रेस ने सरकार से पूछा कि KPMG को किस उद्देश्य से नियुक्त किया गया और PPP मॉडल की आवश्यकता क्यों पड़ी।
जनता के अधिकारों की गुहार
कांग्रेस ने स्पष्ट जानकारी की मांग की कि PPP में अस्पताल का नियंत्रण किसके पास रहेगा, इलाज की दरें कौन तय करेगा, गरीब मरीजों के मुफ्त या रियायती इलाज की क्या व्यवस्था रहेगी, आयुष्मान भारत के अलावा आम मरीजों को क्या सुविधाएँ मिलेंगी और शिकायत‑स्थिति में जवाबदेही किसकी होगी। साथ ही उन्होंने PPP समझौते की प्रमुख शर्तें सार्वजनिक करने की माँग रखी।
स्थानीय राजनीति पर निशाना
विजय केशरवानी ने बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के हालिया बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी और कहा कि पुराने राजनीतिक मुद्दों से ध्यान बाँटकर जनता की वर्तमान समस्याओं को टाला नहीं जा सकता। उन्होंने दोहराया कि अस्पताल के परिचालन व PPP निर्णय वर्तमान सरकार के अधीन हैं, इसलिए जवाबदेही भी उसी की है।
नाम और जनभावना
अस्पताल का नाम स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के नाम पर रखा गया है; कांग्रेस ने यह भी पूछा कि क्या यह नाम केवल सम्मान तक सीमित रहेगा या सचमुच गरीबों और जरूरतमंदों को प्राथमिकता दी जाएगी।
कांग्रेस की माँगें
अस्पताल को तत्काल पूरी क्षमता से चालू किया जाए।
सभी आवश्यक चिकित्सकीय व तकनीकी पदों पर भर्ती शीघ्र की जाए।
ICU, कैथ लैब, ऑक्सीजन प्लांट, इमरजेंसी व एंबुलेंस सेवाएँ तुरंत शुरू की जाएँ।
PPP लागू होने से पहले गरीब व आम मरीजों के इलाज की लिखित गारंटी दी जाए।
PPP से जुड़े सभी मुख्य दस्तावेज और शर्तें सार्वजनिक की जाएँ।
कांग्रेस का निष्कर्ष है कि यह केवल एक संचालन का मामला नहीं, बल्कि बिलासपुर की जनता के स्वास्थ्य अधिकार का सवाल है। उन्होंने सरकार से कहा — जनता को उद्घाटन नहीं, इलाज चाहिए; आश्वासन नहीं, जवाब चाहिए। सरकार से तुरंत स्पष्टीकरण व कार्रवाई की अपेक्षा जताई गई है।