न्यूज रुटीन @ बालोद। जल जीवन मिशन के अंतर्गत जिले में पेयजल आपूर्ति सुचारू करने के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन इसी दौरान विद्युत विभाग में बड़े स्तर पर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। विभागीय अधिकारियों पर निविदा प्रक्रिया पूर्ण होने से पहले ही लाखों रुपये के कार्य कराने के आरोप लगे हैं।जानकारी के अनुसार, पीएचई विभाग ने क्लोरीनेटर रूम और बोरवेल पंपों के लिए बिजली कनेक्शन की डिमांड जमा की थी। इसके बाद विद्युत विभाग ने इन कार्यों के लिए निविदा आमंत्रित की, जिसकी प्रथम चरण प्रक्रिया 24 नवंबर को पूर्ण होनी है। इसके बावजूद, विभागीय अधिकारियों ने टेंडर जारी होने से पहले ही कार्य पूर्ण करा लिए।कन्याडबरी में 2.84 लाख का कार्य पहले ही पूराजेवरतला वितरण केंद्र अंतर्गत संबलपुर(क) के आश्रित गांव कन्याडबरी में 8 नवंबर से कार्य प्रारंभ कर 17 नवंबर तक 2.84 लाख रुपये की लागत से काम पूरा कर लिया गया। सरपंच ने पुष्टि की कि पोल खड़े कर लाइन डाल दी गई है और मीटर भी लगा दिया गया है।रानीतराई में 2.24 लाख का कार्य जारीइसी डीसी क्षेत्र के रानीतराई गांव में भी नए कनेक्शन के लिए पोल स्थापना का काम बिना निविदा के किया गया। यहाँ तार और ट्रांसफार्मर लगाने का कार्य अभी जारी है। कनिष्ठ अभियंता नीलम देशलहरे ने बताया कि यह कार्य उनके कार्यभार ग्रहण करने से पहले सुरेगांव डीसी के जेई ओमप्रकाश ध्रुव द्वारा कराया गया था।मुड़खुसरा में 70 हजार का निष्पादन “इमरजेंसी” बताकरइसी तरह मुड़खुसरा गांव में भी लगभग 70 हजार रुपये का कार्य बिना निविदा के कराया गया। प्रभारी जेई ओमप्रकाश ध्रुव ने इसे “आपातकालीन कार्य” बताते हुए डिमांड नोट के आधार पर करवाने का दावा किया।कार्यपालन अभियंता जवाब देने से बचते दिखेजब कार्यपालन अभियंता एस.के. बंड से इस संबंध में पूछा गया, तो उन्होंने शुरू में केवल डिमांड आने और कनेक्शन शीघ्र देने की बात कही। किन्तु यह स्पष्ट नहीं कर सके कि टेंडर प्रक्रिया अधूरी रहते कार्य कैसे करा लिया गया। बाद में उन्होंने कहा— “काम हो गया होगा, तो निविदा निरस्त हो जाएगी।” इस कथन ने विभाग की कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े कर दिए हैं।नियमों का उल्लंघन और संभावित पक्षपातसरकारी नियमों के मुताबिक कार्य प्रारंभ करने से पहले सर्वे, प्राक्कलन, डिमांड जमा और निविदा की प्रक्रिया पूरी की जाती है, जो सामान्यतः एक माह का समय लेती है। इसके बावजूद कार्यों को पहले ही पूरा कर लिया गया, जिससे यह संदेह गहराता है कि किसी पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए जल्दबाजी में नियम तोड़े गए।मुख्यमंत्री के विभाग में लचरता उजागरऊर्जा विभाग का प्रभार स्वयं मुख्यमंत्री के पास होने से यह मामला और गंभीर हो जाता है। विभागीय स्तर पर ऐसी मनमानी शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सीधे प्रश्न उठा रही है। कार्यपालन अभियंता और कनिष्ठ अभियंताओं के परस्पर विरोधी बयान विभागीय अव्यवस्था को रेखांकित करते हैं।जांच और कार्रवाई पर उठे सवालअब सवाल यह है कि—क्या इन बिना निविदा कराए गए कार्यों की जांच होगी?क्या निविदाओं को निरस्त या पुनः आमंत्रित किया जाएगा?क्या जिम्मेदार अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?बालोद विद्युत विभाग का यह प्रकरण शासन की नीतिगत पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है।