Ambagarh chawki news : अंबागढ़ चौकी: एनीकट का पानी ठेकेदार को लाभ पहुँचाने के आरोप में खाली, प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

संक्षेप

अंबागढ़ चौकी एनीकट विवाद: बिना लिखित आदेश पानी छोड़ा गया, नगर पंचायत पर सवाल

Ambagarh chawki news : अंबागढ़ चौकी: एनीकट का पानी ठेकेदार को लाभ पहुँचाने के आरोप में खाली, प्रशासनिक लापरवाही पर सवाल

विस्तृत खबरें

न्यूज रुटीन@ मोहला , मानपुर ,अंबागढ़ चौकी:-  नगर पंचायत अंबागढ़ चौकी में एक बार फिर प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शिवनाथ नदी पर बने एनीकट का पानी एक ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग पूरी तरह खाली करा दिया गया। इस कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और नगर पंचायत की भूमिका पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।


जानकारी के अनुसार शिवनाथ नदी में निर्मित इंटकवेल से संबंधित निर्माण कार्य के लिए ठेकेदार द्वारा नदी में पानी कम करने की आवश्यकता बताई गई थी। आरोप है कि पानी का स्तर सीमित मात्रा में कम करने के बजाय एनीकट का अधिकांश पानी ही निकाल दिया गया, जिससे नदी का जलस्तर काफी नीचे पहुंच गया।

फिल्टर वॉल से नीचे पहुंचा पानी

पानी खाली होने से फिल्टर वॉल के नीचे जल स्तर पहुंच गया है, लिहाजा नगर वासियों को फिल्टर कर पानी उपलब्ध करवाना मुश्किल लग रहा है। अब देखना होगा कि शनिवार को नगरवासीयों को पानी कैसे मुहैया कराया जाएगा।


जल संकट के बीच पानी की बर्बादी पर सवाल

क्षेत्र में हर वर्ष गर्मी के दौरान जल संकट की स्थिति बनती है। ऐसे समय में बड़ी मात्रा में पानी को गेट खोलकर बहा देना स्थानीय लोगों को समझ नहीं आ रहा है। नागरिकों का कहना है कि जहां एक ओर शासन-प्रशासन जल संरक्षण और जल बचाने के लिए अभियान चला रहा है, वहीं दूसरी ओर अं चौकी वासियों की पानी को नगर पंचायत की निगरानी में हजारों लीटर पानी राजनांदगांव की ओर छोड़ दिया गया।

गेट बंद करने के दौरान टूटा एनीकट का गेट

सूत्रों के अनुसार पानी निकालने और बाद में गेट बंद करने की प्रक्रिया के दौरान एनीकट का एक गेट क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि गेट टूटने के कारण भी पानी का अनियंत्रित बहाव हुआ है। 

बिना लिखित आदेश के कार्रवाई का आरोप

मामले का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि एनीकट का पानी खाली करने के लिए किसी सक्षम अधिकारी का लिखित आदेश उपलब्ध नहीं था। यदि बिना लिखित अनुमति के इस प्रकार की कार्रवाई की गई है तो यह प्रशासनिक नियमों के उल्लंघन का मामला माना जा सकता है। स्थानीय लोगों ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार की भूमिका स्पष्ट करने की मांग की है।

ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के आरोप

बताया जा रहा है कि मोंगरा जलाशय से चार दिन पूर्व पानी छोड़ा गया था वही पएनीकट के समीप बन रहे इंटकवेल के निर्माण कार्य में बन रहे बेस  में पानी का रिसाव होने लगा, जानकारी के अनुसार  अधिकारियों से मौखिक आदेश पर पानी कम करने की बात सामने आई पानी कम करने नगर नगर पंचायत के कमर्चारी और ठेकेदार के कर्मचारी द्वारा गेट से खोल दिया गया लेकिन गेट बन करना ही भूल गए वही एनीकट का पानी पूरी तरह बह गया आनन फानन में नगर पंचायत और ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा गेट बंद एनीकट पहुँचे लेकिन  पानी पूरी तरह से बह चुका था  स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि निर्माण कार्य में सुविधा देने के लिए नगर पंचायत ने ठेकेदार के हित को प्राथमिकता दी अधिक पानी छोड़ने से नगरवासियों को खासा दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। लोगों का कहना है कि यदि केवल कार्यस्थल पर पानी कम करना आवश्यक था तो वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी, लेकिन पूरे एनीकट का पानी खाली करना उचित नहीं था।

सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता भूपेंद्र बावनठडे ने पुष्टि कर बताया कि कार्य करने वाले लोगों से हमारी बातचीत गेट खोलने को लेकर हुई थी, लिखित आज्ञा नहीं ली गई थी। गेट टूटने की वजह से पानी खाली हुआ है जिसकी भरपाई अन्य जगह से की जाएगी। टीम भेजकर गेट बनवाया जा रहा है।

जांच की मांग तेज

मामले के सामने आने के बाद नगर पंचायत की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की है कि पानी खाली करने का निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया, क्या इसके लिए लिखित अनुमति थी और इससे हुए नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी ।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले को किस गंभीरता से लेता है और जल संकट के बीच पानी की कथित बर्बादी को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब कब तक सामने आता है।