न्यूज रुटीन @ बालोद, 22 जून 2026। मानसून के दौरान आकाशीय बिजली और वज्रपात की घटनाओं में संभावित वृद्धि को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे. एल. उइके ने जिलेवासियों से सतर्क रहने और आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील की है।
उन्होंने कहा कि आकाशीय बिजली एक प्राकृतिक आपदा है, जिससे बचाव के लिए समय रहते सावधानी बरतना अत्यंत आवश्यक है। बिजली चमकने या बादलों की गर्जना सुनाई देने पर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर चले जाना चाहिए। घर में रहने के दौरान नंगे पैर पानी के नल को नहीं छूना चाहिए तथा बिजली से संचालित उपकरणों को बंद कर देना चाहिए। साथ ही खुले स्थानों, बिजली के खंभों, मोबाइल टावरों और धातु की वस्तुओं से दूरी बनाए रखना जरूरी है।
सीएमएचओ ने बताया कि खराब मौसम के दौरान दोपहिया वाहन, साइकिल, ट्रक, नौका या अन्य खुले वाहनों में यात्रा कर रहे लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर शरण लेनी चाहिए। धातु की डंडी वाले छाते का उपयोग नहीं करना चाहिए तथा कपड़े सुखाने के लिए लोहे के तार के स्थान पर जूट या सूत की रस्सी का उपयोग करना चाहिए।
किसानों, मजदूरों और ग्रामीणों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि खेतों में कार्य करते समय मौसम खराब होने पर तुरंत सुरक्षित स्थान पर पहुंचें। यदि सुरक्षित स्थान उपलब्ध न हो तो सूखी लकड़ी, प्लास्टिक, बोरा या सूखे पत्तों का उपयोग कर स्वयं को जमीन से अलग रखें और दोनों पैरों को सटाकर बैठें। इस दौरान जमीन पर लेटना बिल्कुल नहीं चाहिए।
उन्होंने तैराकी कर रहे लोगों, मछुआरों तथा जलाशयों के आसपास मौजूद नागरिकों से भी तत्काल पानी से बाहर निकलने की अपील की। साथ ही खुले स्थानों पर समूह में खड़े होने से बचने और एक-दूसरे से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की सलाह दी।
डॉ. उइके ने जिलेवासियों से मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनियों का पालन करने तथा आकाशीय बिजली से बचाव संबंधी दिशा-निर्देशों को गंभीरता से अपनाने का आग्रह किया है, ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि और दुर्घटना से बचा जा सके।