Sarangarh news : मारपीट कांड पर प्रशासन एक्शन मोड में, दोषी पर गिरेगी गाज!

संक्षेप

शासकीय दफ्तर में गुंडागर्दी, पत्रकार पर हमला!

Sarangarh news : मारपीट कांड पर प्रशासन एक्शन मोड में, दोषी पर गिरेगी गाज!

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गोपी अजय :  न्यूज रुटीन @  सारंगढ बिलाईगढ़  : - जिले में प्रशासनिक सक्रियता का एक सशक्त उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब कृषि विभाग के कार्यालय में हुई मारपीट की गंभीर घटना पर कलेक्टर डॉ. संजय कन्नौजे ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सख्त रुख अपनाया। इस कार्रवाई से आमजन के बीच प्रशासन के प्रति भरोसा और अधिक मजबूत हुआ है। कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए उप संचालक कृषि (डीडीए) को चार बिंदुओं पर तथ्यात्मक एवं प्रमाणिक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। यह कदम स्पष्ट संकेत देता है कि जिले में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता या असामाजिक व्यवहार को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कलेक्टर की कार्यशैली एक जिम्मेदार, संवेदनशील और पारदर्शी प्रशासनिक नेतृत्व का परिचायक है। उन्होंने न केवल निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की है, बल्कि दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई का रास्ता भी साफ कर दिया है। इससे यह भी स्पष्ट हो गया है कि शासकीय कार्यालयों की गरिमा और कानून व्यवस्था से किसी प्रकार का समझौता नहीं होगा।

*घटना क्रम -* यह घटना 16 अप्रैल की है जिस दिन सारंगढ़ के क्षेत्रीय पत्रकार ने एक बुजुर्ग महिला के किसान सम्मान निधि की राशि ना मिलने की समस्या को लेकर क़ृषि विभाग के उप संचालक आशुतोष श्रीवास्तव से मिलने पहुचे थे इस सम्बन्ध मे ज़ब पत्रकार ने उप संचालक आशुतोष श्रीवास्तव से बात की तो उन्होंने ग्राम विस्तारक अधिकारी  प्रवीण पटेल से मिलवाया और इसे भी पूरी किसान सम्मान निधि का पैसा रुका होने का बात बताया की सर इसको जल्दी ठीक कर दीजिये बुजुर्ग माताजी बार बार आवेदन दे चुकी है अब तक समस्या का समाधान नहीं हुआ है इसी बिच पद और पावर की घमंड मे चूर ग्राम विस्तारक अधिकारी प्रवीण पटेल ने पत्रकार पर मार पिट करना सुरु कर दिया वही बाकि उपस्थित पत्रकार के साथ हो रहे मार पिट का मजा ले रहे थे साथ हो साथ उप संचालक और उनके अधिकारी कर्मचारी पत्रकार को सरकारी काम मे बाधा के झूठे केस मे फ़साने की धमकी तक दे डाले 

*अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला -* इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू पत्रकार पर किया गया हमला है, जो न केवल निंदनीय है बल्कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। एक पत्रकार का कार्य सच्चाई को सामने लाना और समाज को जागरूक करना होता है। ऐसे में उन पर हमला करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानून व्यवस्था दोनों के विरुद्ध है। मारपीट में शामिल आरईओ प्रवीण पटेल के खिलाफ कलेक्टर द्वारा छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत कारण बताओ नोटिस जारी किया जाना एक सराहनीय और आवश्यक कदम है। शासकीय सेवा में रहते हुए इस प्रकार का कृत्य न केवल अनुशासनहीनता दर्शाता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की छवि को भी धूमिल करता है। ऐसे कृत्य किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हैं और दोषी के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होना आवश्यक है, ताकि भविष्य में कोई भी कर्मचारी या व्यक्ति इस प्रकार की हरकत करने का साहस न कर सके।